कहीं पिपली लाईव फिल्म को जीवंत तो नहीं कर दिया राजनीती ने ! जानिए OROP का पूरा सच !

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क्या है OROP

OROP का मतलब है वन रैंक वन पेंशन 

वन रैंक, वन पेंशन का मतलब है कि सशस्‍त्र बलों से रिटायर होने वाले समान रैंक वाले अफसरों को समान पेंशन, भले वो कभी भी रिटायर हुए हों. यानि 1980 में रिटायर हुए कर्नल और आज रिटायर होने वाले कर्नल को एक जैसी पेंशन.

जब दो सैनिक एक पद पर, एक समय तक सर्विस कर के रिटायर होते हैं पर उनके रिटायरमेंट में कुछ सालों का अंतर होता है और इस बीच नया वेतन आयोग भी आ जाता है, तो बाद में रिटायर होने वाले की पेंशन नए वेतन आयोग के अनुसार बढ़ जाती है। लेकिन पहले रिटायर हो चुके फौजी की पेंशन उसी अनुपात में नहीं बढ़ पाती।

“स्वतंत्र भारत में कोई भी भूख से नहीं मरेगा।अनाज निर्यात नहीं किया जायेगा। कपड़ों का आयात नहीं किया जाएगा। इसके नेता ना विदेशी भाषा का प्रयोग करेंगे ना किसी दूरस्थ स्थान, समुद्र स्तर से 7000 फुट ऊपर से शासन करेंगे। इसके सैन्य खर्च भारी नहीं होंगे। इसकी सेना अपने ही लोगों या किसी और की भूमि को अधीन नहीं करेगी। इसके सबसे अच्छे वेतन पाने वाले अधिकारी इसके सबसे कम वेतन पाने वाले सैनिको से बहुत ज्यादा नहीं कमाएंगे। और यहाँ न्याय पाना ना खर्चीला होगा ना कठिन होगा”।

पूर्व सैन्यकर्मियों को मिल रहा है  फायदा
देश में 25 लाख से ज्यादा रिटायर्ड सैन्यकर्मी हैं। उदाहरण के लिए योजना इस तरह बनाई गई है कि जो अफसर कम से कम 7 साल कर्नल की रैंक पर रहे हों उन्हें समान रूप से पेंशन मिलेगी। ऐसे अफसरों की पेंशन 10 साल तक कर्नल रहे अफसरों से कम नहीं होगी, बल्कि उनके बराबर ही होगी।
कब से उठी मांग
वन रैंक-वन पेंशन की मांग रिटायर्ड सैनिक कई सालों से कर रहे हैं। 30 साल पहले एक्स सर्विसमेन एसोसिएशन बनाई गई थी।  2008 में इंडियन एक्स सर्विसमैन मूवमेंट (आईएसएम) नामक संगठन बनाकर रिटायर्ड फौजियों ने संघर्ष तेज कर दिया।
इसलिए उठी मांग?
– रिटायर्ड सैन्यकर्मी लंबे समय से वन रैंक-वन पेंशन की मांग कर रहे हैं। वन रैंक-वन पेंशन की मांग को लेकर कई पूर्व सैन्यकर्मियों ने अपने पदक लौटा दिए थे। इसकी पहली वजह यह है कि अभी सैन्यकर्मियों को एक ही रैंक पर रिटायरमेंट के बाद उनकी सेवा के कुल वर्षों के हिसाब से अलग-अलग पेंशन मिलती है।
– छठां वेतन आयोग लागू होने के बाद 1996 से पहले रिटायर हुए सैनिक की पेंशन 1996 के बाद रिटायर हुए सैनिक से 82% कम हो गई। इसी तरह 2006 से पहले रिटायर हुए मेजर की पेंशन उनके बाद रिटायर हुए अफसर से 53% कम हो गई।
– मांग उठने की एक वजह यह भी है कि चूंकि सैन्यकर्मी अन्य सरकारी कर्मचारियों की तुलना में जल्दी रिटायर हो जाते हैं, इसलिए उनके लिए पेंशन स्कीम अलग रखी जाए।
– केंद्र के नौकरशाह औसतन 33 साल तक सेवाएं देते हैं और अपनी आखिरी तनख्वाह की 50% पेंशन पाते हैं। आर्मी में सैनिक आमतौर पर 10 से 12 साल की उम्र में रिटायर हो जाते हैं और सैलरी की 50% से कम पेंशन पाते हैं।

ओ आर पी योजना 1973 तक लागू थी मगर उसके बाद बंद हुई।

यह  योजना कांग्रेस के वक्त में ही बंद हुई।
तबसे लगातार इस पर संघर्ष किया जा रहा था। 8 फरवरी 2008 में लगभग 300 सैनिकों ने अपने नियुक्ति पत्र वापस किये । 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे लागू करने का आदेश दिया परंतु कांग्रेस ने देर कर इसे फरवरी में लागू करने का फैसला किया और उसी वक्त चुनाव आ गए जिससे यह फिर अधर में लटक गया। फिर इस योजना को अप्रैल 2016 में मोदी सरकार ने चालू किया। 46 साल के राहुल गांधी को 43 साल के बाद इस पर अब मुद्दा भुनाने का बड़ा अवसर प्राप्त हुआ है। वहीँ रामकिशन अपने गाँव के सरपंच थे और उनके चुनाव में कांग्रेस ने मदद की थी। उन पर लाखों का कर्ज था ।

अब जानिए कुछ रामकिशन जी के बारे में 

जवाहर भान के पीछे लॉन पर  भूतपूर्व सैनिक राम किशन ग्रेवाल की आत्महत्या की ! पर कितने लोगो को उनके बारे में पता है

  1. राम किशन ग्रेवाल हरियाणा में भिवानी जिले से एक 70 वर्षीय सेना अनुभवी है। उनके पिता का नाम नाथू राम है

  2. वह 2004 में सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त, 28 साल के लिए सेना की सेवा के बाद सेवानिवृत हुए

  3. उनकी सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने भिवानी में बमला  गांव के सरपंच बने।

  4. हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, राम किशन निर्मल ग्राम पुरस्कार 2008 में अपने गांव के कल्याण के लिए उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया उसके बाद राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल नेउन्हें सम्मान दिया

  5. ग्रेवाल कुछ समय के लिए OROP मुद्दे पर परेशान किया गया था। उन्होंने  जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन OROP में एक सक्रिय योगदान किया था ।

  6. एक ज्ञापन रक्षा मंत्रालय को OROP मुद्दे पर प्रस्तुत करने वह अपने साथियों से तीन के साथ नई दिल्ली के लिए आये थे

  7. ऐसा कहा जाता है कि इस मुद्दे पर उन्होंने नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा

मिल रही थी सुविधा रामकिशन जी को ORP की 

Defence ministry ने कनफर्म किया है की Ex-armyman रामकिशन OROP के लाभार्थी लिस्ट में हैं । उनकी कम पेंशन का कारण Narendra Modi सरकार नहीं बल्कि SBI bank Bhiwani Branch है जिसने One Rank One Pension scheme के तहत उनका पेंशन गलत केलकुलेट किया । SBI Bhiwani Branch को इस बाबत नोटिस भेजा जा चुका है ।
रामकिशन ग्रेवाल जी की 2004 मे रिटायरमेंट के बाद Rs 13000 पेंशन बनती थी जो की OROP (6th pay commission) के बाद Rs 28000 हो जानी चाहिए थी पर SBI Bhiwani Branch की गलती की बजह से सिर्फ Rs 23000 उनके अकाउंट मे क्रेडिट होता था । मतलब कुल Rs 5000 उन्हे बैंक कम दे रहा था ।
40 साल से पेंडिंग One Rank One Pension की माँग को अपने ढाई साल के कार्यकाल मे निबटाते हुए #Modi सरकार फ़ौजियों को अब तक Rs 5,507.47 crore दे चुकी है । July 2014 तक OROP के कुल 20,63,763 लाभार्थी थे, जिनमे से 19,12,520 को बढ़ी हुई पेंशन की रकम दी जा चुकी है । और 1,50,313 ऐसे केस हैं जिनका की वेरिफिकेशन किया जा रहा है ।
OROP के तहत डिसवर्स रकम का पहला installment Rs 3886.88 crore था और दूसरा Rs 1,604.59 crore जो की कुल रकम Rs 5,507.47 crore बनती है ।

 

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं

पूर्व सैनिक की आत्महत्या का मामला।
यह घटना बहुत दुःखद है और इस पर जितना भी शोक किया जाए कम ही है। लेकिन कुछ तथ्य अब भी ऐसे हैं जो इशारा कर रहे हैं की जो दिख रहा है शायद वैसा है नहीं।
मृत पूर्वसैनिक दिल्ली में मनोहर पर्रिकर रक्षामंत्री से मिलने जाना चाहते थे,लेकिन कोई official appointment क्यों नहीं ली।
अपने दोस्तों के साथ पार्क में बैठे आगे की योजना बनाते हुए एकदम से अचानक ज़हर क्यों खा लिया ? यह बात समझ में नहीं आई, आखिर किसने और किस तरह उत्प्रेरित किया ?
सैनिक का बेटा भी पूरे समय तक राजनेताओ के संपर्क में था, आखिर क्यों?
सैनिक का बेटा हॉस्पिटल में ही धरना और प्रोटेस्ट करना चाहता था, इसके पीछे की वजह क्या होसकती है और आखिर क्यों?
मृत सैनिक के बेटे ने हॉस्पिटल में ही इंटरव्यू भी दे डाला, ऐसा क्यों?
मृत सैनिक का बेटा पोस्टमॉर्टम नहीं कराने पर भी अड़ा हुआ है, क्या कहानी है, कोई बताएगा की क्यों?
उपरोक्त कुछ वो सवाल हैं जो रह रह कर मन में जनमानस के उठ रहे हैं। हो सकता है हम गलत भी हो।
लेकिन एक बात तय है कि कोई भी सैनिक इतने कमज़ोर नहीं होते जो इतना जल्दी आत्महत्या कर लें। पिछले 40 साल में किसी सैनिक ने OROP के मुद्दे पर आत्महत्या तो नहीं की। आज जबकि ज्यादातर मुद्दे सुलझा लिए गए हैं, तब एक दम से अचानक आत्महत्या करना हमारे किसी के भी गले तो नहीं उतर रहा।
आपने टीवी पर सुनाई जा रही ऑडियो भी सुनी ही होगी, जिसमे वो मृतक पूर्वसैनिक अपने बेटे से बातचीत भी अच्छे से कर रहा है। दोनों लोग आराम से बातचीत कर रहे हैं कहीं भी किसी में भी घबराहट नहीं दिखी न ही बेटे में और न बाप में ही । बच्चे ने भी पिता को बचाने में दिलचस्पी नही दिखाई।
इसी सब से महसूस होता है की सब कुछ कही प्री प्लान तो नही था।
कही ये ये मरवाया तो नही गया है, लाशो के ठेकेदार राजनीतिज्ञ गिद्धो द्वारा..??
अब सरकार को त्वरित और आक्रामक रूप में निष्पक्ष रूप से वापस आना चाहिए नही तो समझिये जैसे बिहार चुनाव में अख़लाक़ हुआ, यूपी में OROP वाला रामकिशन छा जायेगा
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अब तक का सबसे बड़ा खुलासा, राम किशन के बारे में वो सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं ।

1. रामकिशन 2004 में सेना से सेवानिवृत्त हो कर स्थानीय राजनीती में उतरे और कांग्रेस नेताओं से नज़दीकियों की बदौलत सरपंच बने ।

2. 2004 से कांग्रेस शासन में उनकी पेंशन मात्र 13000 रूपये थी जो की मोदी सरकार में OROP के लागू होने के बाद 28000 हो गयी थी ।

3. कांग्रेस से नजदीकी की बदौलत ही उन्हें सन् 2005 और 2008 में राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत किया गया, उन्हें ये पुरस्कार ODF (Open Defection Free) यानि गांव के हर घर में शौचालय बनवाने और खुले में शौच को पूर्ण रूप से बंद करने के कारण मिला ।

4. सन् 2015 में सर्कार के पास एक शिकायत आयी की राम किशन द्वारा किये गए दावे झूठे हैं और ऐसे में उन से पुरस्कार वापस लिया जाना चाहिए।

5. सर्कार ने जब जांच की तो पाया कि महज़ 15% घरों में ही शौचालय बनाये गए थे, जिबकी दावा 100% घरों में शौचालय बनाने का किया गया था जो की सिर्फ कागज़ों पर था हकीकत में नहीं ।

6. जांच आगे बढ़ी तो पाया गया रामकिशन द्वारा फ़र्ज़ी बिलों का भुगतान किया गया है, इस पर सन् 2016 में सर्कार ने रामकिशन को आरोपी बनाया ।

7. रामकिशन अब सर्कार को गुमराह करने, सरकारी खजाने को नुकसान पहुचाने, धोखाधड़ी करने, कूट रचित दस्तावेज़ तैयार करने के आरोपी बन चुके थे, ऐसे में उनका बचना लगभग असंभव था ?

8. रामकिशन ने ये घोटाला अकेले नहीं किया था बल्कि अपने बाकि के राजनितिक साथियों के साथ मिल कर इस घोटाले को अंजाम दिया था, जब उन सब को लगा की अब हम सब फंस जायेंगे तो उन्होंने रामकिशन को ये आईडिया सुझाया की तुम ज़हर खाने का नाटक करो, हम सब तुम्हे बचा लेंगे (जैसा गजेंद्र को आश्वासन दिया गया था) लेकिन वे नेता और उनके हाईकमान रामकिशन को ख़त्म कर उस केस को बंद करना चाहते थे जिसकी वजह से उनकी गर्दन फंस गयी थी ?

क्या कोई सैनिक आत्महत्या कर सकता है ? कौन थे वो लोग जो रामकिशन के साथ थे और फ़ोन पर पीछे से रामकिशन को बता रहे थे की क्या बोलना है ? वो लोग किस राजनैतिक पार्टी के सदस्य या नेता है ? क्या वो सब भी इस घोटाले में शामिल थे ? तो क्या रामकिशन की हत्या में बड़े नेता भी शामिल हैं ? क्या इन्ही बड़े नेताओं ने अपना नाम बचाने के लिए रामकिशन की बलि दे दी, और उसे मौत के घाट उतार दिया ?
ऊपर से राहुल गांधी का अचानक इतना सक्रिय हो जाना….
10 दिन में सीमा पर लड़ रहे 10 सैनिको की लाशें तिरंगे में लिपटी घर वापस आयी । उनमें से किसी एक के घर नही गये राहुल शोक संवेदना प्रकट करने ।
31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी को उनके दो अंगरक्षकों बेअंत सिंह और सतवंत सिंह ने गोली मारकर हत्या कर दी।

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उन दोनों को भी तत्काल गोलियों से भून दिया गया।

फिर पूरे मामले को खालिस्तान मूवमेंट से जोड़ते हुये पूरे देश में सिक्खों का कत्लेआम हुआ।

इंदिरा गांधी की हत्या के समय उनके साथ रहे लोग बताते हैं कि जब बेअंत और सतवंत सिंह इंदिरा गांधी पर अपनी बंदूक की पूरी मैगजीन खाली कर चुके थे तो बाकी सुरक्षा दस्ते ने उन्हें तत्काल गिरफ्तार कर लिया था।फिर उन्हें एक कमरे में ले जाया गया और वहाँ कुछ ही देर बाद उन्हें गोली मार दी गयी।

ऐसे में सवाल यह है कि जब इंदिरा गांधी के हत्यारे पकड़ में आ चुके थे तो उन्हें गोली क्यों मारी गयी?इंदिरा गांधी की हत्या को खालिस्तान और आपरेशन ब्ल्यू स्टार से जोड़कर देश भर में कत्लेआम मचाने से पहले यह जानने की कोशिश क्यों नहीं की गयी कि क्या इस हत्या के पीछे कोई विदेशी साजिश तो नहीं है?

यहाँ लेखको  के विचार पूर्णत: निजी हैं , एवं  केस लीक  इसमें उल्‍लेखित बातों का न तो समर्थन करता है और न ही इसके पक्ष या विपक्ष में अपनी सहमति जाहिर करता है। इस लेख को लेकर अथवा इससे असहमति के विचारों का भी केस लीक स्‍वागत करता है । इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है। उपरोक्त लेख विभिन्न सोशल मिडिया से अभारित है 

वन रैंक वन पेंशन (OROP) मुद्दे पर खुदकुशी करने वाले पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल ने अपनी मौत से पहले परिवारवालों से बात की थी। बातचीत में रामकिशन ने जवानों के साथ OROP में हुए अन्याय की बात कह रहे थे। रामकिशन ने फोन पर अपने बेटे से कहा,’ मैंने जहर खा लिया है। हमारे देश के जवानों के साथ अनर्थ हो रहा है, जवानों को न्याय नहीं मिला है। हमें ये लड़ाई लड़नी थी। हम जवानों के साथ अन्याय होते नहीं देख सकते।’

बातचीत में रामकिशन का बेटा रोने लगता है, लेकिन पूर्व सैनिक देशभक्ति की बात करते हुए उसे अपनी पत्नी से बात कराने को कहता है। रामकिशन कहते हैं कि देश के लिए जान लुटाने वाले जवानों के साथ अन्याय दुखी करने वाला है।

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