तलाश कोरोना वैक्सीन की: 165 से ज्यादा पर शोध जारी, चार ट्रायल के तीसरे चरण तक,

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वैक्सीन तलाशने का काम भी तेजी से चल रहा है। मगर अभी तक सौ फीसदी सफलता नहीं मिल पाई है। हाल ही में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों की वैक्सीन से उम्मीद की किरण जगी है। हालांकि कोरोना से निजात पाने में हमें थोड़ा इंतजार और करना होगा। 

दुनियाभर में वैक्सीन विकसित करने पर काम किया जा रहा है। भारत में भी मानव परीक्षण के ट्रायल शुरू हो चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक बुधवार तक 165 से ज्यादा वैक्सीन पर तमाम देशों के भीतर काम चल रहा है। हालांकि सिर्फ एक ही वैक्सीन को सीमित प्रयोग के लिए मान्यता मिल पाई है। 
वैक्सीन बनाने के प्रमुख चरण
जांच-पड़तालः इसमें यह पता लगाया जाता है कि वायरस कोशिकाओं को कैसे प्रभावित करता है। फिर यह देखा जाता है कि क्या इम्यून सिस्टम बढ़ाने के लिए उसी वायरस प्रोटीन का प्रयोग हो सकता है या नहीं? फिर एंटीजन की पहचान कर एंटीबॉडीज बनाया जाता है। 
प्री-क्लिनिकल: इंसानों पर ट्रायल से पहले यह सुनिश्चित किया जाता है कि वह वैक्सीन सुरक्षित है या नहीं। पहले इन्हें जानवरों पर परीक्षण किया जाता है। यहां सफलता मिलने के बाद ही आगे बढ़ा जाता है।
क्लिनिकल ट्रायल : इसके तहत इंसानों पर परीक्षण किया जाता है। इसके भी तीन चरण हैं। 
पहले चरण में 18 से 55 साल के 20-100 स्वस्थ लोगों पर परीक्षण किया जाता है। देखा जाता है कि इम्यूनिटी बन रही है या नहीं। 
दूसरे चरण में 100 से ज्यादा इंसानों पर ट्रायल किया जाता है। इस चरण में बच्चों और बुजुगों को भी शामिल किया जाता है ताकि असर का पता चल सके। 
तीसरे चरण में सैकड़ों लोगों पर दवा का ट्रायल किया जाता है। अगर सब कुछ सही रहता है तो ही वैक्सीन की सफलता की घोषणा की जाती है।
कैसे मिलती है मान्यता 
अगर तीसरा चरण सफल रहता है तो वैक्सीन बनाने के लिए सरकार की मंजूरी की जरूरत पड़ती है। इसके लिए सभी चरणों की डाटा और नतीजों की रिपोर्ट सौंपनी होती है। इसके बाद ही मंजूरी देने पर फैसला किया जाता है। मंजूरी मिलने के बाद दवा या वैक्सीन का उत्पादन शुरू हो जाता है। 
वैक्सीन किसी भी देश की हो, दूसरे देश के पास यह अधिकार होता है कि वह इसका फिर से ट्रायल करवा ले। 
कई बार अन्य देश दवा या वैक्सीन के नतीजों के आधार पर भी सीधे मंजूरी दे देते हैं। 
किसी दवा को मंजूरी मिलना अमेरिका में सबसे मुश्किल काम है। अमेरिकी एजेंसी फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन एफडीए इस मामले में सबसे सख्त है। 
कितनी वैक्सीन अभी कौन से चरण में 
वैक्सीन को बाजार में आने से पहले कई चरणों में गुजरना पड़ता है। पिछले कई महीनों से वैज्ञानिक इसी कोशिश में जुटे हुए हैं। 
अभी तक 142 वैक्सीन प्री-क्लिनिकल स्तर पर हैं। इसका मतलब हुआ कि अभी इसका इंसानों पर ट्रायल होना बाकी है। 
19 वैक्सीन ऐसी हैं जो ट्रायल के पहले चरण में हैं। इन वैक्सीन को लेकर इस बात की जांच की जा रही है कि यह कितना सुरक्षित है और इसकी कितनी खुराक देनी चाहिए। 
अब तक 13 वैक्सीन दूसरे चरण में पहुंच चुकी हैं। सुरक्षित तरीके से इनका ट्रायल शुरू किया जा चुका है। 
अभी तक सिर्फ चार वैक्सीन ही ऐसी हैं, जो तीसरे चरण में पहुंच चुकी हैं। मतलब इनकी टेस्टिंग अब एक बड़े समूह पर किया जा रहा है।
 सिर्फ एक ही वैक्सीन ऐसी है, जिसे सीमित प्रयोग के लिए अनुमति दी गई है। 
कोरोना वैक्सीन अभी हमसे कितनी दूर
रूस की सेचेनोव यूनिवर्सिटी का दावा है कि वैक्सीन सितंबर तक आ जाएगी। 
अमेरिका की मॉडेर्ना का दावा है कि इस साल के अंत तक वैक्सीन बाजार में उपलब्ध हो जाएगी।
यूरोपीय मेडिसिन्स एजेंसी की मानें तो उनकी वैक्सीन अगले साल की शुरुआत में तैयार होगी। 
जायडस कैडिला की वैक्सीन 2021 की शुरुआत में आने की उम्मीद है।

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