शर्मनाक ! जयपुर में मनुस्मृति को जलाने की दी गई धमकी ! भारी बवाल की आशंका !

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विश्व के केवल जयपुर के हाईकोर्ट परिसर में मनु ऋषि की प्रतिमा लगी है। एक नया नया दलित नेता जिग्नेश मेवाणी ने एलान किया है कि 6 दिसम्बर 2016 को जयपुर परिसर में मनुस्मृति को जलायेगा।

अम्बेडकर ने 25 दिसम्बर 1927 को और 9 मार्च 2016 को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में मनुस्मृति को जलाया गया।

मनुस्मृति कब लिखी गई, क्या मनुस्मृति आज जिस अवस्था में है वैसे ही लिखी गई थी या इसमें काफी छेड़छाड़ की गई, इसकी जांच किये बिना हिन्दू धर्म ग्रंथों को जलाना एक षणयंत्र नही है?

हिन्दू धर्म और हिन्दुओ को नष्ट करने की शाजिस हो रही है जिसका सख्त विरोध करना चाहिये।
सभी बंधुओ से निवेदन है कीसका भरपूर विरोध करें !

जयपुर संपर्क सूत्र

डॉ विजय मिश्र – 9251444040

क्या है मनु स्मृति

मनुस्मृति हिन्दू धर्म का सबसे महत्वपूर्ण एवं प्राचीन धर्मशास्त्र (स्मृति) है। इसे मानव-धर्म-शास्त्र, मनुसंहिता आदि नामों से भी जाना जाता है। यह उपदेश के रूप में है जो मनु द्वारा ऋषियों को दिया गया। इसके बाद के धर्मग्रन्थकारों ने मनुस्मृति को एक सन्दर्भ के रूप में स्वीकारते हुए इसका अनुसरण किया है। हिन्दू मान्यता के अनुसार मनुस्मृति ब्रह्मा की वाणी है।

धर्मशास्त्रीय ग्रंथकारों के अतिरिक्त शंकराचार्य, शबरस्वामी जैसे दार्शनिक भी प्रमाणरूपेण इस ग्रंथ को उद्धृत करते हैं। परंपरानुसार यह स्मृति स्वायंभुव मनु द्वारा रचित है, वैवस्वत मनु या प्राचनेस मनु द्वारा नहीं। मनुस्मृति से यह भी पता चलता है कि स्वायंभुव मनु के मूलशास्त्र का आश्रय कर भृगु ने उस स्मृति का उपवृहण किया था, जो प्रचलित मनुस्मृति के नाम से प्रसिद्ध है। इस ‘भार्गवीया मनुस्मृति’ की तरह ‘नारदीया मनुस्मृति’ भी प्रचलित है।

मनुस्मृति वह धर्मशास्त्र है जिसकी मान्यता जगविख्यात है। न केवल भारत में अपितु विदेश में भी इसके प्रमाणों के आधार पर निर्णय होते रहे हैं और आज भी होते हैं। अतः धर्मशास्त्र के रूप में मनुस्मृति को विश्व की अमूल्य निधि माना जाता है। भारत में वेदों के उपरान्त सर्वाधिक मान्यता और प्रचलन ‘मनुस्मृति’ का ही है। इसमें चारों वर्णों, चारों आश्रमों, सोलह संस्कारों तथा सृष्टि उत्पत्ति के अतिरिक्त राज्य की व्यवस्था, राजा के कर्तव्य, भांति-भांति के विवादों, सेना का प्रबन्ध आदि उन सभी विषयों पर परामर्श दिया गया है जो कि मानव मात्र के जीवन में घटित होने सम्भव है। यह सब धर्म-व्यवस्था वेद पर आधारित है। मनु महाराज के जीवन और उनके रचनाकाल के विषय में इतिहास-पुराण स्पष्ट नहीं हैं। तथापि सभी एक स्वर से स्वीकार करते हैं कि मनु आदिपुरुष थे और उनका यह शास्त्र आदिःशास्त्र है।



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