​मस्तक पर तिलक लगाने का महत्त्व -डॉ विजय मिश्र

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​मस्तक पर तिलक लगाने का महत्त्व (शरीर शास्त्र के अनुसार, प्राणशक्ति के अनुसार, Acupressure के अनुसार)
समस्त शरीर का संचालन मस्तिष्क करता है और मस्तिक का ललाट का भाग सबसे महत्वपूर्ण होता है। यह एक वैज्ञानिक तथ्य है की दोंनो भौंहों के बीच कुछ अतिरिक्त संवेदनशीलता होती है। यदि हम आँखे बंद करके बैठ जाएँ और कोई व्यक्ति हमारे भ्रू-मध्य के एकदम निकट ललाट की ओर तर्जनी उँगली ले जाए, तो वहाँ हमें कुछ विचित्र अनुभव होगा । 
हमारे शरीर में अपार शक्ति के भंडार सात सूक्ष्म ऊर्जा केंद्र होते हैं, इन्हें चक्र कहा जाता है। मस्तिष्क के भ्रु-मध्य ललाट में जिस स्थान पर टीका या तिलक लगाया जाता है यह भाग आज्ञाचक्र है ।आज्ञा चक्र एक ऐसा चेतना केन्‍द्र है जहां से समस्‍त ज्ञान चेतना और क्रियात्‍मक चेतना का समग्र रूप से संचालन होता है। आज्ञाचक्र ही दिव्‍य नेत्र का प्रतीक है । मस्तक पर तिलक लगाने से आज्ञाचक्र  जाग्रत होने से मनुष्‍य की शक्ति में उतेजना आती है।

 

शरीर शास्त्र के अनुसार पीनियल ग्रन्थि का स्थान होने की वजह से, जब पीनियल ग्रन्थि को जाग्रत किया जाता हैं, तो मस्तक के अन्दर एक तरह के प्रकाश की अनुभूति होती है ।  इसी वजह से धार्मिक कर्मकाण्ड, पूजा-उपासना व शूभकार्यो में टीका लगाने का प्रचलन है / हिन्दु परम्परा में मस्तक पर तिलक लगाना शुभ माना जाता है इसे सात्विकता का प्रतीक माना जाता है।

जिस ग्रन्थि को शरीर विज्ञानी पीनियल कहते है- उसे पौराणिक वर्णन के अनुसार तृतीय नेत्र कहा गया है। जबकि तंत्र और योगशास्त्र उसे आज्ञाचक्र की संगति देते आये है।
चीन के मास्टर चो कोक् सुई ने प्राणशक्ति से उपचार की कला को वैज्ञानिक रूप दिया।

ललाट चक्र- यह चक्र ललाट यानि माथे के बीच स्थित होता है। यह पीनियल ग्रन्थि और तन्त्रिका तन्त्र को नियन्त्रित करता है। इसके ठीक तरह से कार्य न करने पर यादाश्त में कमी, लकवा और मिरगी जैसे रोग हो सकते हैं।
Acupressure Points for Relieving Headaches and Migraines.

Points (A) — Third Eye Point 

Location: Directly between the eyebrows, in the indentation where the bridge of the nose meets the forehead. Benefits: This point balances the pituitary gland, and relieves hay fever, headaches, indigestion, ulcer pain, and eyestrain.
धर्म शास्त्र  लिखित  – 

अनामिका शांति दोक्ता,मध्यमायुष्यकरी भवेत्।

अंगुष्छठ:पुष्टिव:प्रोत्त,तर्जनी मोक्ष दायिनी।।
अर्थात् तिलक 

धारण करने में अनामिका अंगुली मानसिक शांति प्रदान करती है, मध्यमा अंगुली मनुष्य की आयु वृद्धि करती है, अंगूठा प्रभाव, ख्याति और आरोग्य प्रदान करता है, इसलिए विजयतिलकअंगूठेसे ही करने की परम्परा है। तर्जनी मोक्ष देने वाली अंगुली है। इसलिए मृतक को तर्जनी से तिलक लगाते हैं।
डॉ विजय मिश्रा

जयपुर

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