टूटा कर अलग हुआ बड़ा ग्लेशियर, दुनिया में आ सकती है महाप्रलय

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पूरी दुनिया में कुदरत का सफेद प्रकोप आने वाला है। बड़े से बड़े देशों की मुसीबतें बढ़ने वाली हैं, क्योंकि अंटार्कटिका से सबसे बड़ा बर्फ का टुकड़ा टूटकर अलग हो गया है। अंटार्कटिका में मौजूद चौथे सबसे बड़े हिमखंड लार्सेन सी का एक बहुत बड़ा हिस्सा टूटकर अलग हो गया है। बर्फ के इस चट्टान का वजन खरबों टन बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि ये अब तक का सबसे बड़ा टुकड़ा है, जो हिमचट्टान से अलग हुआ है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका आकार बाली के इंडोनेशियाई द्वीप के बराबर हो सकता है। बर्फ का ये टुकड़ा कितना विशाल और भारी भरकम है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका वजन खरबों टन है। इसका आकार 5800 वर्ग किलोमीटर है और ये दिल्ली से चार गुना बड़ा है। लंदन से साढ़े तीन गुना ज्यादा है तो अमेरिका के न्यूयॉर्क से 7 गुना बड़ा है।

ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका में सर्वे किया, जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पता चला कि 10 और 12 जुलाई के दरम्यान अब तक का सबसे बड़ा हिमखंड लार्सेन सी से टूटकर अलग हो गया। लार्सेन सी से 5 हजार 800 किमी. का हिस्सा अलग हो चुका है, लिहाजा यहां बर्फीले चट्टान का आकार 12 फीसदी तक कम हो गया है। इसी के साथ ही अंटार्कटिक प्रायद्वीप की सूरत भी हमेशा के लिए बदल गया है।

वैज्ञानिक इस हिमखंड का नाम अब A68 रखने की तैयारी में हैं। आपको बता दें कि अंटार्कटिका से 1995 में लार्सेन-ए और 2002 में लार्सेन बी हिमखंड पहले ही ढहकर खत्म हो चुके हैं। लेकिन इस बार बर्फ का जो चट्टान टूटा है वो पूरी दुनिया की मुसीबत बढ़ाने वाला है। ये दुनिया में तबाही का अलर्ट है। वक्त रहते जागना जरूरी है, वरना सफेद आफत सामने खड़ी है।

वैज्ञानिकों की मानें तो इस हिमखंड के अलग हो जाने से पूरी दुनिया के समुद्री जल स्तर में 10 सेंटीमीटर की बढ़ोत्तरी हो जाएगी। ये हिमखंड इस महाद्वीप के पास से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा पैदा करेगा।

बड़ा सवाल ये है कि इस घटना का भारत पर क्या असर पड़ेगा…
– अंडमान और निकोबार के कई टापू समुद्र में डूब सकते हैं।
– बंगाल की खाड़ी में सुंदरवन के हिस्से भी जलमग्न हो सकते हैं।
– भारत की 7 हजार 500 किलोमीटर लंबी तटीय रेखा को भी इससे खतरा है।

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