बोर्न सीरीज़ की फिल्मों की खासियत वह मरीन(हीरो) है जिसे अमेरिकन सरकार एक स्पेशल प्रोजेक्ट के द्वारा तैयार करती है।उसमे एक मरीन ट्रेनिंग दे कर उसे तैयार करने पर 80-100 करोड़ डालर का खर्च आया दिखाया गया है।यह अलग बात है की जेसन बार्न को कोई मार नही पाता।

उसकी चुस्ती-दुस्ती-और फुर्तीलापन,साथ में गजब के दांव-पेंच जबकि उसकी मेमोरी भी नही है। फिल्म हिट हुई थी। मै आपको बता दूँ कि भारत मे ही एक साधारण सैनिक तैयार करने में देश को 10-25 लाख रुपय खर्चने पडते हैं,पीजी मेडिको डॉकटर तैयार करने में देश को 80 लाख रुपये से ऊपर खर्च होता है। एक इंजीनियर 12 लाख रुपए में तैयार होता है,आईआईटी में पढ़ने पर यही खर्च 60 लाख रूपये जनता की कमाई में से जाता है।पुलिस का एक सिपाही तीन से 5 लाख मे तैयार होता है।एक कमांडो 1 करोड़ रूपये में बनता है।अच्छा वैज्ञानिक सरकारी पैसे से 40 लाख रुपए में तैयार होता है।एक अच्छा अधिकारी तैयार करने में सरकार को तीन से चार करोड़ खर्चने होते हैं। देश का अच्छा एटॉमिक साइंटिस्ट तैयार करने में एक से 3 करोड़ खर्च हो जाते हैं।जब ज्यूलाजिस्ट निकलता है तब तक उसको सब मिलाकर भारतीय शिक्षा पद्धति में से एक करूं 40 लाख रुपए खर्च करवा चुका होता है।अमेरिकन मैरीन 60-80 लाख तक मे तैयार होता है।यह डालर की बात है।एक भारतीय जेड प्लस,सी कैट भी तकरीबन इतना खर्चने के बाद तैयार हो पाता है।उपरोक्त सारे आकडे सरकार के एक अनुमान पर आधारित है।जिसे आप अधिकृत ही समझिए।

लेकिन कभी आपने सोचा है एक अच्छा स्वयंसेवक तैयार करने में संघ को कितनी ताकत लगानी पड़ती होगी।अनुमानतः कितना खर्च करना पड़ता होगा। उसके प्रशिक्षण के लिए कितनी ऊर्जा,संसाधन,लक्ष्य,समर्पित कार्यकर्ता तैयार करने में कितनी शक्ति जाया करनी पडी होगी?संघ में प्रशिक्षण हुए बगैर कुछ नही हो सकता।शुरुआती दौर में आईटीसी कराया जाता है यह ‘प्राथमिक शिक्षण वर्ग, के नाम से जाना जाता है..आठवीं से ऊपर के या कम से कम १४ वर्ष से ऊपर के विद्यार्थी उसमे शामिल हो सकते हैं।यह कुल एक हफ्ते का होता है जिसमें बुनियादी जानकारी दी जाती है।आप इन सात दिनों में बाहर नहीं जा सकते और सुनिश्चित दिनचर्या में ही रहना होता है।देश भर के सभी जिलों या विभागों(अमूमन एक विभाग में तीन जिले होते हैं) में यह प्रत्येक मई और दिसम्बर अथवा स्थानीय अवकाश/सुविधानुसार आयोजित किया जाता है।यह समझिये।शाखा स्तरके दायित्त्व के लिए आईटीसी अनिवार्य है।इन शिक्षण वर्गो को ही राष्ट्र साधना समझिए।

आईटीसी के बाद होता है ओटीसी (आफिसर ट्रेनिंग कैम्प)’संघ शिक्षण वर्ग,।यह तीन अलग-अलग सालों में होता है।फर्स्टइयर,सेकण्ड-इयर और थर्ड-ईयर।आप लगातार का तो सोचियेगा भी नही।मेरा अनुभव है बहुत कम लोगो का लगातार हो पाता है।सारे शुल्क और गणवेश और यात्रा-खर्चे आपके होते हैं।सभी कार्यकर्ता,व्यवस्था-वाले,प्रशिक्षक,शिक्षार्थी,सुरक्षा,बौद्धिक,शारीरिक मे लगे लोग सभी अपना समय,शुल्क और खर्च खुद वहन करते है।संघ चंदे और रसीद नही कटाता।स्वयंसेवक को अपने खर्चे खुद वहन करना होता है।देश-भर के प्रत्येक प्रान्त में साल के प्रत्येक गर्मी में प्रथम वर्ष/द्वितीय वर्ष संघ शिक्षण वर्ग (ओटीसी) आयोजित होते हैं संख्या और सुविधानुसार यह घटाएं बढाए जाते हैं।.प्राय: १ जून से २१ जून तक चलता है. यह एक कठिन श्रम,अनुशासन और संयम व बौद्धिकता से भरा १८ घंटे प्रतिदिन का प्रशिक्षण है।जो आपको सन्गठन,तर्क और दैहिक विशिष्टताओं से भर देता हैं।प्रथम वर्ष के लिए आईटीसी अनिवार्य है।दसवीं से अथवा १६ साल से अधिक की उम्र,स्वास्थ्य ठीक,व जिम्मेदार नागरिक का होना आवश्यक है।द्वितीय वर्ष के लिए प्रथम वर्ष किया होना आवश्यक है।वह भी संघ द्वारा नियत जिम्मेदारियों/दायित्वो के निर्वहन के साथ।उन दिनोंओम की कठिन श्रम सीखने की योग्यता के अलावा आपका खुद का अनुशासन व नजरिया द्वितीय वर्ष के शिविर में स्पस्ट हो जाता है।इन दोनों वर्गों में शारीरिक-मानसिक और जमीनी निपुडता तो प्राप्त ही कर लेते हैं आप सामाजिक जीवन को ठीक से सीख जाते हैं।प्रौढ़-वर्ग के लिए देश में दो-तीन जगह अक्तूबर माह में भी लगाया जाता है।वैसे सब का पाठ्यक्रम पूर्व निर्धारित होता है।बिलकुल विश्वविद्यालयों की तरह।और हां अंत में इम्तिहान भी होता है।चलते-चलते आपके रिजल्ट की भी घोषणा होती है।

तृतीय वर्ष संघ-शिक्षण वर्ग इस दुनिया का सबसे कठिन तपस्या से भरी हुई ट्रेनिंग होती है।जहां से उत्तम-कोटि के सेनापति निकलते हैं।हरेक योग्यता-गुण से भरा राष्ट्र-संगठक तैयार किया जाता है।पिछले सत्तर सालों से उसकी अवधि हर साल के ९ मई से १० जून यानी एक माह होती है।तृतीय वर्ष के लिए द्वितीय वर्ष और स्नातक होना आवश्यक है।एक ही स्थान पर होता है नागपुर में।संघ का जन्म-स्थल होने के कारण।उस समय नागपुर देश का सबसे गर्म स्थान होता है।मतलब की सर का पसीना तलवे तक पहुचता है।उसमें लघु-भारत की अदभुत अनुभूति भी आपको सहज ही राष्ट्र-बोध करा देती है।पूरे देश के कोने-कोने से आये स्वयंसेवको से मुलाकात तो होती ही है।दुनियां भर में रह-रहे भारत-वंशी भी इस आख़िरी प्रशिक्षण के लिए आते हैं।संघ का समस्त शीर्ष-नेत्रित्व वहां पूरे समय रहता है।परिचय करता है।और आपको जानता समझता है।आप भी चिंतन के उस लेबिल पर उतरने लगते हैं।हर वर्ग आपमें उतरोत्तर-गुणातमक विकास करता है।अगर आपने तृतीय वर्ष कर लिया तो फिर दैहिक-भौतिक और दैविक तीनों ही ताप शांत कर लेंगे।कष्ट आपको कभी न सतायेंगे और भारत का हरेक नागरिक आपको भाई लगने लगेगा।यह संघ की सर्वोच्च डिग्री है।इसका परीक्षण तो दायित्त्व-निर्वहन से ही होगा न।इस वर्ग का महत्व समझने के लिए इतना कहना पर्याप्त होगा संघ से सम्बंधित समस्त संगठनों का शीर्ष विचारक या नेत्रित्व तृतीय वर्ष ट्रेंड है।मोदी,राजनाथ सिंह, अटल जी,आडवाणी जी, रामलालजी,राम माधव जी,लगभग सभी संगठन मंत्री,प्रचारक,संघ से सम्बंधित सभी अनुसंगी संगठनों के केंद्रीय-प्रदेशिक प्राधिकारी सब के सब तृतीय वर्ष शिक्षित हैं।बेसिकली यह ट्रेनिंग कैम्प आपमें सामजिक रूप से सक्रियता-संगठन और नेत्रित्व क्षमता जागृत करते हैं।हमारे समाज की यही कमी और कमजोरी रही है।हमें हजार साल से गुलाम बनाये हुए थी।निराकरण यही था की सम्पूर्ण समाज जागृत और संगठित हो।संघ के अथक प्रयास से वग अब जागृत भी हो रहा है।अन्य समाजो की तरह व्यवस्थित भी।बहुत तपस्या हुई, बहुत पीढियां गली,हजारों की जवानी चढ़ी।तब जाकर आज विराट संगठन खड़ा है।

पहले दिन पकड़ने से लेकर,आईटीसी कराना,ओटीसी प्रथम,द्वितीय वर्ष,तृतीय वर्ष भेजने तक उस पर कम से कम 20 प्रचारकों का पूरा जीवन लग चुका होता है। एक शाखा में ग्रहस्थ कार्यकर्ताओं के श्रम से जोड़ दिया जाए तो संघचालक,कार्यवाह,मुख्य शिक्षक, शारीरिक प्रमुख, व्यवस्था प्रमुख, की सघन ऊर्जा और तमाम संसाधन उस पर लगते है। संपूर्ण संगठन की सभी इकाइया उसे तैयार करने पर अपनी पूरी उर्जा झोक देती है। केवल यही नही गहरा मार्गदर्शन, गहरी प्रेरणा, गहरा चरित्र, गहन अध्यन, लगातार उसको व्यक्तिगत संपर्क में रखने के लिए जीवनदानी कार्यकर्ताओं की एक लंबी कड़ी उसको संस्कारित करती है। किसी मनुष्य के जीवन की कितनी कीमत होगी, आप कितना कीमत लगाएंगे एक ऐसा त्यागी मनुष्य जिसने राष्ट्र को अपना सुमन संपूर्ण जीवन दे दिया? पढ़ लिख कर के तैयार होने के बाद उसके त्याग की कितनी कीमत लगाएंगे?
आप इस तरह एक अच्छा तृतीय वर्ष स्वयंसेवक तैयार करना कितना दुरूह,दुष्कर, और श्रमसाध्य कार्य है। इसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते।एक दिन मैंने बैठकर सबका आर्थिक वैल्यूएशन किया।सब जोड़ने पर यह आंकड आगे आया।अगर समस्त श्रम, संसाधनो,प्रयासों को करेंसी में बदला जाए तो एक तृतीय वर्ष प्रषिक्षित कार्यकर्ता 3 से 10 करोड रुपए में तैयार होता है। हालांकि यह रुपए खर्च नहीं होते लेकिन अगर हमने वेतन दिए होते,उसको मार्केट में लगाया होता, उसका बाजारी मूल्यांकन किया होता तो इससे कम कीमत कतई नहीं आएगी।यह मेरा अनुमान है लेकिन पूर्णत: तत्थ्यों पर आधारित है।एक तृतीय वर्ष प्रशिक्षित कार्यकर्ता किसी बड़े अमेरिकी कर्नल से ज्यादा प्रशिक्षित,कमिटेड, प्रतिबद्ध,समर्पित और ध्येयनिष्ठ होता है।इसके पीछे कुछ लोगों का त्याग, बलिदान आदर्श और गहरी प्रेरणा होती है।उसे आग में डाल दो,पानी में डाल दो, आसमान में उछाल दो वह समत्व भाव से भारत माता के लिए काम करता है।भारत माता के प्रति उसकी आराधना भाव में कतई कमी नही आयगी। प्रतिज्ञित- प्रशिक्षित कार्यकर्ता की यह पहचान है, जो भारत माता के लिए अपना संपूर्ण जीवन दाव पर लगा दे,जो राष्ट्र निर्माण के लिए हर क्षण सतत प्रयत्नशील रहे, जिसकी निष्ठाएं असंदिग्ध हो।संभवत कोई मशीनरी ऐसे कार्यकर्ता, ऐसे देशभक्त नागरिक तैयार नहीं कर सकती जैसा संघ की रीति-नीति से निकले कार्यकर्ता होते हैं,यही संघ की उपलब्धि है।जेसन-बार्न आसानी से नही तैयार होते।

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