भारत में ब्राम्हणो की स्थिति।- डॉ विजय मिश्रा।

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हमारे देश में आज़ादी से अभी तक जातियों के आधार पर कोई प्रमाणिक आंकलन नही हुआ है। राजनीतिज्ञों को डर है की आंकड़े आने के बाद राजनितिक दलों में उथल पुथल ना मच जाये । जब तक ज्ञान ना हो तब तक आप जो कहेगे मान लिया जायेगा । 
भारत में जनसँख्या के आंकड़ो की गणना कौटिल्य में सर्व प्रथम श्री चाणक्य, एक महान अर्थशाश्त्री ने अपने ‘अर्थशाश्त्र’ में भूमि, कृषि, कर सिधांत का पालन में किया था जिसका पालन मुग़ल काल तक किया गया । पहली प्रचिलित जनगणना 1865 से 1872 के बीच किया गया 

कितना बड़ा रहस्य है की J.H Hutton 1931 के जनगणना के कमिश्नर ने लिखा ‘From the outset in 1872, there was never a formal definition of the census categories for caste, race or tribe. As an example of this, in 1891, the Jats and Rajputs were recorded as castes and as tribes, although the category of tribe was not formally adopted until the 1901 census’  और ब्राह्मणों के लिए लिखा They relied heavily on elitist strictures through their interpretation of regional literature[d] and on the advice of Brahmins, who subscribed to a traditional but impractical ritual ranking system, known as varna.[7] This reliance on elites formed part of a colonial strategy to create attachment to a national identity in an arbitrarily defined, highly disparate whole. कमिश्नर साहव ने केवल मुस्लिम और क्रिश्चियन को ही गणना योग्य माना । हमारे देश में 2011 में जनगणना के 10 साल बाद अर्थात 2021 में प्रस्तावित है  ।  आज भी SC और ST की गणना का ही उल्लेख्य मिलता है कंही भी सवर्ण जाति की संख्या की गणना का उल्लेख्य नही मिलता ।

बिभिन्न पटलो पर, बहुत दिनों से ब्राह्मणों की संख्या पर बहस और अनर्गल बाते होते देख रहा हूँ यदि आप ब्राह्मणों के उत्तथान और उन्नति का कार्य में इक्षुक है तो कुछ आंकड़े समझना आवश्यक हो जाता है जिससे किसी योजना को क्रियान्वित करने में सरलता हो । कोई कहता है 36 करोड़, 25 करोड़ ब्राह्मण है कोई 11 और कोई 10 या 5 करोड़ ।

संस्था और ब्राह्मण की संख्या  का सम्बन्ध – दिन प्रति दिन खर पतवार की तरह बनती ब्राह्मण हित की संस्थाओ को देख कर हर्ष भी होता है तो दुःख भी ! हर्ष का कारण की जागरूकता आ रही है और दुःख का कारण की कोई संस्था किसी और संस्था को ना तो सहयोग करना चाहती है ना ही शामिल । और आश्चर्य यह की आपकी अपनी संस्था ही सर्वोच्च है बाकी सब निम्न । में किसी संस्था का संचालक नही हूँ पर पिछले तीन साल से भारत में ब्राह्मण हित के लिए कार्य कर रही संस्थाओ को एक पटल पर (केवल नाम ही ) लाने का अवश्य प्रयास कर रहा हूँ । यदि कोई संस्र्था सच में ब्राह्मणों का विकास करना चाहती है तो अपनी तहसील स्तर, जिला स्तर, राज्य स्तर पर एक होने का प्रयास करे अन्यथा आप हित नही अब अहित कर रहे है , केवल नाम, माला और तालियों के लिए । ब्राह्मण की गणना और विवेचना से आज के ब्राह्मण की आर्थिक स्तिथि, ह्रास और समस्या निवारण पर विचार किया जा सकता है ।

पिछले कुछ समय से प्रयास कर रहा था की भारत में ब्राह्मणों की संख्या क्या है और आज़ादी के बाद से हमारी क्या स्तिथि बन रही है जाना जाये । कुछ आंकड़े एकत्रित किये है और कोई दावा नही है की शत प्रतिशत सही है । हाँ! लगता है की वास्तविकता के पास अवश्य हूँ । आप इसमें 10% घटा बढ़ा कर देखने का प्रयास करे ।

  1. भारत सरकार की 2011 की जनगणना के हिसाब से 

(http://censusindia.gov.in/Tables_Published/A-Series/A-Series_links/t_00_005.aspx) 

हिन्दू 84.10 (1951) 82.73% (1971) 81.53% (1991) 79.80% (1911)

इस्लाम 9.80% (1951) 82.73% (1971) 12.61% (1991) 14.23% (1911)

क्रिश्चिनिटी  2.30% (1951) 2.60% (1971) 2.32% (1991) 2.30% (1911)

सिख 1.79% (1951) 1.89% (1971) 1.94% (1991) 1.72%  (1911)

बौद्ध  0.74% (1951) 0.70% (1971) 0.77% (1991) 0.70% (1911)

जैन  0.46% (1951) 0.48% (1971) 0.40% (1991) 0.37% (1911)

ज़ोराशात्रियन  0.13% (1951) 0.09% (1971) 0.08% (1991) NA

अन्य82.73% 0.43% (1951) 0.41% (1971) 0.44%  (1991) 0.90% (1911)
2. 2007 में Times of India में छपी खबर के अनुसार हिन्दुओ (79.80%) का वर्गीकरण इस प्रकार है 

(http://timesofindia.indiatimes.com/india/OBCs-form-41-of-population-Survey/articleshow/2328117.cms) 

 A survey by the National Sample Survey Organisation (NSSO) put the OBC population in the country at 40.94%,  the SC population at 19.59%, ST population at 8.63% and the rest at 30.80% in 2007

Hindus SC(Dalits) :  Hindu ST(Adivasis):  Hindu OBCs: Hindu Forward caste

19.59% 8.63% 40.94% 30.84%

 

  1. 2011-12 की गणना के अनुसार जनसंख्या वृद्धि दर 17.7 प्रतिशत थी। अलग अलग धार्मिक समुदायों में हिन्दू 16.8% , मुस्लिम 24.6%, क्रिश्चियन 15.5%, सिख 8.4, बौद्ध 6.1% और जैन 5.4% 

(http://www.brahminpedia.com/2015/10/brahmin-population-in-india-analysis.html)

(http://www.firstpost.com/india/india-has-79-8-percent-hindus-14-2-percent-muslims-2011-census-data-on-religion-2407708.html) 
(The growth rate of population in the decade 2001-2011 was 17.7 percent. The growth rate of population of the different religious communities in the same period was as Hindus: 16.8 percent; Muslim: 24.6 percent; Christian: 15.5 percent; Sikh: 8.4 percent; Buddhist: 6.1 percent and Jain: 5.4 percent.)
4. 2007 में OUT LOOK MAGAZINE के सर्वे के अनुसार निम्न आंकड़े बताये थे जिसको THE HINDU अखवार ने भी प्रमाणित किया था 

i) Total Population: 5.6 crore

ii) Poor Brahmins: 13%

iii) Poor Brahmins: 13%

iv) Rich: 19%

v) Literacy levels above the age of 18: 84%

vi) Graduates: 39%

vii) Brahmin chief justices between 1950 to 2000: 47%

viii) Associate justices between 1950-2000: 40% 

Falling percentage of Brahmin MPs elected in the Hindi belt

i) 1984: 19.91%

ii) 1989: 12.44%

iii) 1998: 12.44%

iv) 1999: 11.3%

v) 2007: 9.17 

ऊपर के आंकड़ो से देखे तो पता चलता है की MP ब्राह्मण 1984 में 19.91 से गिरकर 9.17 पर आ गया। क्यों की ब्राह्मण को मानवतावादी बना दिया गया । अब ब्राह्मण किसी भी दल से हो हमें ब्राह्मणों को ही केवल वोट देना चाहिए । 

Conclusions

Brahmins are a minority group in India. Their ancient culture is threatened because of discrimination by consecutive Governments in forms of caste and minority based reservations.

As per Census data Scheduled Castes, Scheduled Tribes, Other Backward Classes and Muslims make up 71% of India’s population. Yet they are the recipient of numerous benefits in terms of education and jobs at the cost of Brahmins who make up less than 5%.

If we use my re-calibrated data above, Scheduled Castes, Scheduled Tribes, Other Backward Classes and Muslims make up 73% of India’s population, whereas Brahmins are at 4.6% only.
ध्यानदेने योग्य बात है की यदि 2011की जनगणना के अनुसार 30.84% सवर्ण  जाति में ब्राह्मण, क्षतिय, कायस्थ, गुर्जर, अहीर, सिन्धी, जैन, वैश्य, सिख  आदि आदि सभी आते है यदि ब्राह्मण 36करोड़ हास्यास्पद और 25 करोड़, तो कुल जनसँख्या का 18% होता है जो संभव नही है।

लेखक – डा विजय मिश्रा

जयपुर

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