ग्लेशियरों के पिघलने से हिमाचल के लिए खतरा बनीं 800 झीलें

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चटख धूप में अचानक धौली गंगा का रौद्र रूप देखकर तपोवन और रैणी क्षेत्र के ग्रामीण भौचक्के रह गए। कलकल और शांत स्वभाव में बहने वाली ऋषि गंगा इतनी तबाही मचा देगी, लोगों ने कभी सोचा नहीं था। नदी की गर्जन को देख लोग भागो-भागो की आवाजें लगा रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि ऐसा आज तक नहीं देखा गया। 

ऋषि गंगा शीर्ष भाग से ढलान पर बहती है, जिससे नदी का पानी तेज बहाव से निचले क्षेत्र में पहुंचा और सब कुछ तबाह करके चला गया। रैणी गांव के शंकर राणा ने बताया कि सुबह 9ऱ्30 बजे अचानक ऊंचे हिमालयी क्षेत्र से सफेद धुएं के साथ नदी मलबे के साथ बहकर आ रही थी। नदी की डरावनी आवाज से लोग घरों से बाहर निकल गए थे।

तपोवन निवासी संदीप नौटियाल ने बताया कि रोजमर्रा की तरह लोग मेहनत मजदूरी के लिए जा रहे थे। तपोवन-विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना के निर्माण में मजदूर काम कर रहे थे। जैसे ही धौली गांव का जलस्तर बढ़ने लगा, लोगों में अफरा-तफरी मच गई। कई लोग बैराज पर काम कर रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भागने के लिए आवाजें लगा रहे थे, तेज गर्जना से मजदूरों को कुछ सुनाई नहीं दे रहा था। देखते ही देखते बैराज और टनल मलबे में दफन हो गया।

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