मकर संक्रांति पर लाखों श्रद्धालुओं ने संगम में लगाई पुण्य की डुबकी

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शनि प्रदोष के दुर्लभ संयोग में भगवान सूर्य उत्तरायण हो गए। इसी के साथ संक्रांति के दूसरे दिन पुण्यकाल में संतों-भक्तों ने त्रिवेणी संगम में स्नान-ध्यान और दीपदान किया। एक तरफ सर्द हवा के झोंके और दूसरी ओर श्रद्धालुओं के डग आस्था के पथ पर बढ़तेे रहे। संगम पर स्नान के साथ ही कामनाओं का अर्घ्य देने की होड़ रही। रेती पर हवन, भजन के बीच अन्न-वस्त्र का दान कर संत-भक्त धन्य हुए। 

शुक्रवार की रात 8:49 बजे सूर्य ने मकर राशि में प्रवेश किया। इसके बाद शनिवार की मध्यरात्रि से संगम पर मकर संक्रांति का स्नान आरंभ हो गया। भगवान सूर्य के उत्तरायण होने के बाद मध्यरात्रि से गंगा, यमुना, विलुप्त सरस्वती की धारा में पुण्य की डुबकी लगने लगी। हर हर महादेव और गंगा-यमुना के जयकारे गूंजने लगे। भोर में ही संगम का तट संतों-भक्तों की भीड़ से खचाखच पट गया। हर कोई संगम में डुबकी की आस लिए आगे बढ़ता रहा। एमपी के रीवा निवासी श्याम प्रकाश तिवारी अपनी मां को संगम स्नान कराने के लिए भोर में ही पहुंच गए।

उन्होंने भीड़ के बीच सहारा देकर अपनी मां को डुबकी लगवाई। वह कहते हैं कि मां को स्नान कराने का पुण्य अर्जित कर उन्हें अपार खुशी मिली है। इसी तरह देवरिया के भाटपार से मुकुंद बिहारी मिश्र भी अपने बुजुर्ग माता-पिता को स्नान कराने आए थे। पेशे से शिक्षक मुकुंद के अनुसार वह हर माघ मेले में अवकाश लेकर माता-पिता को स्नान कराने के लिए लेकर आते रहे हैं। उनकी नजर में इससे बढ़ा कोई पुण्य नहीं है। ऐसे हजारों की तादात में लोग अपनों का सहारा बनकर मकर संक्रांति स्नान पर्व का हिस्सा बने। 

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