तो क्या बपौती समझी थी इन्होने ?

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कुछ समय पहले ऋषिकुमार अभिनेता ने कहा था की देश की महत्वपूर्ण सम्पत्तियो के नाम पर गांधी की मुहर क्यों? क्या बाप का माल है?
शेक्सपियर ने कहा था की ‘What is in the name’ नाम में क्या रखा है? पर अनुमान के अनुसार 600 सरकारी योजनाओ पर नेहरू गांधी परिवार के नाम पर है। यंहा तक की हर जिले के किसी ना किसी का मोहल्ले, कॉलोनी का नाम भी नेहरू गांधी परिवार के नाम पर है। हद तो यह है की एक घूंट पानी के साथ राजीव् गांधी, हर कौर के साथ इंदिरा गांधी, मकान बनाते हुए भी गांधी परिवार का स्मरण करे।
जिसको राष्ट्रपिता का स्थान दिया महात्मा गांधी उनके नाम से मात्र चार योजनाये है। पिछले 60 सालो में नेहरू परिवार के क्या दिया मै नही जानती पर हाँ नाम खूब दिए।

मोदी सरकार ने जो नाम बदले

■ राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण अभियान योजना – 1 अप्रैल से पंचायत सशक्तिकरण अभियान
■ राजीव गांधी नेशनल फेलिशिप फॉर स्टूडेंट – नेशनल फेलोशिप फॉर स्टूडेंट
■ राजीव गांधी नेशनल फेलोशिप फॉर शिड्यूल्ड कास्ट – नेशनल फेलोशिप फॉर शिड्यूल्ड कास्ट
■ राजीव गांधी खेल अभियान – खेलो इंडिया
■ राजीव ऋण योजना – प्रधानमंत्री आवास योजना
■ ग्रामीण विधुतीकरण का नाम दिन दयाल उपाध्याय के नाम से हो गया है।

इंदिरा गांधी, राजीव गांधी के नाम से छप रहे डाक टिकट भी बंद किये गए। मै समझ नही पा रही हूँ की क्या नेताजी सुभाष चंद्र, सरदार बल्लभ भाई पटेल, शिवा जी, मौलाना आज़ाद, भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, जयप्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया, स्वामी विवेकनन्द, महाराणा प्रताप, रानी लक्ष्मी बाई इन सबको भूल गए?
मै बीजेपी की सदस्य नही ना ही किसी दल की चमची, पर मोदी जी की प्रशंशा अवश्य करुँगी की आज तक कोई योजना नरेंद्र, दामोदर या मोदी के नाम से नही सुनी।
क्या देश एक परिवार की धरोहर रहा है या नेहरू गांधी ने अंग्रेजो से लीज पर लिया था?
उर्जावरक प्रधानमंत्री मोदी के आने के बाद ही पता लगा की देशभवना क्या होती है, देश के दुश्मन कौन है, हमने पिछले 60 सालो में कितने सापों को दूध पिलाते रहे है। आप सब JNU अभी तो ना भूले होंगे? इंशाअल्ला भारत तेरे टुकड़े होंगे क्या हम सब इनको शिक्षित करने के लिए इनकम टेक्स देते रहे है?
इसमें भी कोई शक नही की 60 सालो में खूब काम हुआ है हमने उन्नति भी की है पर यदि परिवारवाद ना होता और स्वार्थी ना होते तो शायद हम चीन से कंही बहुत आगे होते। मेरी तो अब यही कामना करती हूँ की जिस किसी को 2019 में बहुमत मिले पर प्रधानमंत्री मोदी जी ही बने। जय भारत, जय हिंदी, जय ब्राह्मण
लेखक – श्रीमती साधना मिश्र

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