विदेश मंत्री सुषमा ने दिया करारा जवाब पाक को निशाना बनाते हुए संयुक्त राष्ट्र की बैठक में कहाआतंक को पनाह देने वालों को अलग-थलग करना होगा…

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​संयुक्त राष्ट्र के मंच से भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने हुंकार भरी और कहा कि भारत यह मांग करता है कि जो देश आतंकवादियों और आतंकवाद की पनाहगाह हैं, जहां नीयत और कारनामों में आतंकवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है, ऐसे देशों को अलग-थलग करने की जरूरत है.

पाकिस्तान पर तल्ख हमला करते हुए सुषमा ने कहा कि भारत की मित्रता और बंधुत्व का गलत फायदा उठाकर पाकिस्तान लगातार ऐसे लोगों को बढ़ावा दे रहा है जो आतंकवादी हैं और भारत की सुरक्षा और शांति को प्रभावित करने में लगे हैं. उन्होंने कहा, ‘नवाज ने मानवाधिकारों और शर्तों की बात की. नवाज बताएं कि जब पीएम मोदी ने उनसे सेहत का हाल पूछा तो कौन सी शर्त थी. पीएम मोदी ने कौन सी शर्त रखी थी जब अपने शपथग्रहण में नवाज शरीफ को बुलाया था. जब ईद की मुबारकवाद दी. जब काबुल से लौटते समय लाहौर गए थे. हमने दो साल में दोस्ती निभाई, पाकिस्तान ने दोस्ती के बदले उरी, पठानकोट दिया.’ सुषमा ने कहा कि आतंकवाद मानवाधिकारों का सबसे बड़ा उल्लंघन है और यह दुखद है कि हम आतंकवाद को रोकने में सफल नहीं हुए. सुषमा हालांकि पाकिस्तान का नाम लिए बिना अपनी बात कह रही थीं लेकिन उनका निशाना साफ और स्पष्ट था. सधी भाषा में एक गर्म तेवर वाला भाषण देकर सुषमा ने पाकिस्तान के खिलाफ भारत की नाराजगी को मजबूत ढंग से पेश किया.
उन्होंने पूछा, ‘आतंकवादियों को पनाह कौन देता है. आतंकवादियों का मददगार कौन है. प्रतिबंधित आतंकी सरेआम जलसे करते हैं. जिसने आतंकवाद का बीज बोया, उसने कड़वा फल खाया है.’ सुषमा ने कहा कि जिन्हें आतंकवाद को पालने का शौक है, उन्हें अलग-थलग करना होगा.

कश्मीर हमारा है

कश्मीर का मुद्दा पाकिस्तान बारहां उठाता रहा है. संयुक्त राष्ट्र में अपने भाषण के दौरान भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कश्मीर की स्वायत्तता और वहां मानवाधिकारों का मसला उछाला था. सुषमा इस पर पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए बोलीं कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और रहेगा. कश्मीर को हासिल करने का पाकिस्तान का मंसूबा कभी कामयाब नहीं होगा. मित्रता के साथ विवाद सुलझाने की कोशिश की गई. हमें बदले में क्या मिला, उरी जैसा आतंकी हमला? बहादुर अलीसीमापार से आतंकवाद का जीता जागता सबूत है.

बलूचिस्तान में अमानवीयता की हदें

सुषमा स्वराज ने बलूचिस्तान का भी मुद्दा भी उठाया और वहां लगातार जारी मानवाधिकारों के उल्लंघन पर काफी सख्त शब्दों में पाकिस्तान की आलोचना की. सुषमा ने कहा कि बलूचिस्तान में पाकिस्तान ने अमानवीयता की हदें पार कर दी हैं. नवाज शरीफ देखें कि बलूचिस्तान में क्या हो रहा है. नवाज के भाषण का प्रत्योत्तर देते हुए सुषमा ने कहा, ‘जिनके घर शीशे के हों, वो दूसरों पर पत्थर न फेंकें। कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन का राग अलापने वाले पाकिस्तान के लिए इस भाषण के बाद बलूचिस्तान पर शर्मसार होने की स्थिति सुषमा ने अपने भाषण के जरिए पैदा कर दी है. पाकिस्तान को अब बलूचिस्तान में अपनी ज़्यादतियों के लिए विश्व समुदाय को सफाई देनी पड़ेगी.

दृष्टिकोण बदले संयुक्त राष्ट्र 

सुषमा थोड़ी कमजोर लग रही थीं. लेकिन अपनी भाषा और तेवर में वो काफी उग्र और आक्रामक दिखीं. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र को भी याद दिलाया कि आतंकवाद के प्रति 1996 से लंबित समझौते CCITके प्रस्तावों पर देर की वजह से ही आतंकवादियों से निपटने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय नीति नहीं बन पा रही है.

उन्होंने याद दिलाया कि इस दिशा में तुरंत प्रयास करके एक संधि तैयार होनी चाहिए जिसके माध्यम से यह तय किया जा सके कि आतंकवादियों से कैसे निपटा जाए और कैसे उनके प्रत्यर्पण को सुनिश्चित किया जा सके. सुषमा ने अपने भाषण में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का भी सवाल उठाया और इस बात पर ज़ोर दिया कि इस दिशा में दशकों पहले की तय परिपाटी और कुछ ही देशों पर विशेष ध्यान देने की प्रवृत्ति से संयुक्त राष्ट्र को बाहर निकलना होगा.

भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए प्रयासरत है. आतंकवाद और वैश्विक सुरक्षा की दृष्टि से भारत ने अपने दावेदारी को पुनः स्थापित करने की दिशा में एक और पहल इस भाषण के माध्यम से की है। विश्व समुदाय को व्यवहारिक होकर और ताजा स्थितियों का आकलन करके नई नीतियों और तरीकों से आतंकवाद से निपटना होगा, ऐसा सुषमा ने अपने भाषण से स्पष्ट किया. उन्होंने भाषण खत्म करते हुए कहा कि हमारा भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि हम आज क्या कर रहे हैं.

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