चीन और भारत के रिश्तो के बीच पैदा हो सकती मिठास…जानिए कैसे

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भारत के फॉरेन सेक्रेटरी एस. जयशंकर चीन-भारत स्ट्रैटजिक डायलॉग के लिए बीजिंग के दौरे पर हैं। जयशंकर ने चीन के फॉरेन मिनिस्टर वांग यी के साथ मुलाकात की। जयशंकर ने कहा, “आतंकवाद रोकने के लिए भारत-चीन को साथ मिलकर लड़ना चाहिए। चीन बहुत मजबूत है। वह जिस स्थिति में है, उसमें काउंटर टेररिज्म बेहतर तरीके से किया जा सकता है।”

भारत के लिए सॉवेरनिटी बड़ा मुद्दा…
चीन के स्टेट मीडिया ग्लोबल टाइम्स के साथ बातचीत में जयशंकर ने चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) और आतंकी मसूद अजहर का मुद्दा भी उठाया।
– जयशंकर ने कहा, “हमारे लिए सॉवेरनिटी (संप्रभुता) से बड़ी कोई चीज नहीं।” बता दें कि CPEC पाक के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरेगा।
– बता दें कि जयशंकर चीन के एक्सपर्ट माने जाते हैं। वे सबसे लंबे वक्त तक चीन के एम्बेसडर रहे थे।
बॉर्डर डिस्प्यूट दूर करने को हो चुकी है 19 दौर की बातचीत
भारत-चीन के बीच स्ट्रैटजिक-इकोनॉमिक डायलॉग होते रहते हैं। बॉर्डर डिस्प्यूट दूर करने के लिए दोनों देशों के बीच अब तक 19 दौर की बातचीत हो चुकी है। लेकिन दोनों देशों के बीच 1 जनवरी 1950 से मौजूद डिप्लोमैटिक रिलेशन्स के 67 साल में पहली बार इस तरह का स्ट्रैटजिक डायलॉग हो रहा है।
चीन ने लगाया था दो मुद्दों पर अड़ंगा
– चीन एनएसजी में भारत की मेंबरशिप को लेकर अड़ंगा लगाता रहा है। उसकी आपत्ति ये है कि भारत ने अब तक नॉन-प्रोलिफिरेशन ट्रीटी (परमाणु अप्रसार संधि- एनपीटी) पर दस्तखत नहीं किए हैं। चीन का कहना है कि अगर भारत को एनएसजी मेंबरशिप मिलती है तो फिर पाकिस्तान को भी ये दी जानी चाहिए।
– दूसरा मुद्दा आतंकी मसूद अजहर पर यूएन में बैन को लेकर है। कंधार प्लेन हाईजैक का आरोप अजहर पाकिस्तान में है। भारत उस पर यूएन के जरिए बैन लगवाना चाहता है, जबकि चीन पाकिस्तान की मदद के नाम पर इसमें रोड़े अटका रहा है।
हाल ही में चीन ने कहा था- ताइवान कार्ड न खेले भारत
– चीन ने भारत से कहा था कि उसे ताइवान कार्ड नहीं खेलना चाहिए।
– दरअसल, 12 फरवरी को ताइवान का एक महिला डेलिगेशन भारत आया था। चीन ने इस पर एतराज जताया था।
– चीन ने कहा था, “अगर भारत ताइवान कार्ड खेलता है तो ये उसका आग से खेलने जैसा होगा। नई दिल्ली को इसके गंभीर नतीजे भुगतने होंगे।”
– “ये वो वक्त है जब डोनाल्ड ट्रम्प भी ताइवान मुद्दे छेड़ रहे हैं। हमारा बस ये कहना है कि किसी को भी वन चाइना पॉलिसी का सम्मान करना चाहिए।”
– चीनी सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा था, “भारत-ताइवान के बीच हाई लेवल बातचीत हमेशा से नहीं रही। फिर भारत ने ताइवान के डेलिगेशन को क्यों इनवाइट किया?”
– “ये पहली बार है कि भारत ने ताइवान में साई इंग-वेन के प्रेसिडेंट बनने के बाद कोई डेलिगेशन बुलाया हो।”
– बता दें कि वेन पिछले साल ही प्रेसिडेंट चुने गए थे। वे लंबे वक्त से चीन से ताइवान की आजादी की बात कहते रहे हैं।
‘काफी वक्त से चीन के मुद्दों को छेड़ता रहा है भारत’
– आर्टिकल में ये आरोप भी था कि भारत लंबे वक्त से चीन से जुड़े ताइवान मुद्दे, साउथ चाइना सी और दलाई लामा के मसले को हवा देता रहा है।
– “भारत का ताइवान कार्ड खेलने का मकसद चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) को घेरना है।”
– “हाल के सालों में कॉरिडोर के काम में काफी तेजी आई है। लेकिन भारत को चीन की तरक्की देखकर चिंता सता रही है।”
– “लेकिन हम बताना चाहते हैं कि वन बेल्ट-वन रोड का ये प्रोजेक्ट भारत समेत क्षेत्र के सभी देशों को फायदा पहुंचाएगा।”
– “दरअसल, ये कॉरिडोर कश्मीर के विवादित हिस्से से होकर गुजर रहा है। इसलिए भारत के कुछ स्ट्रैटजिस्ट ने मोदी सरकार को ताइवान कार्ड खेलने की सलाह दी।”

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