जानिए आखिर कौन है इरोम चानू शर्मीला और क्या है इनका मुद्दा

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इरोम चानू शर्मिला का जन्म 14 मार्च 1972 को मणिपुर में हुआ था ! ये एक मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं, जो पूर्वोत्तर राज्यों में लागू सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम, 1958 को हटाने के लिए लगभग 16 वर्षों तक (4 नवम्बर 2000[से 9 अगस्त 2016 ) भूख हड़ताल पर रहीं।

इरोम ने अपनी भूख हड़ताल तब की थी जब 2 नवम्बर के दिन मणिपुर की राजधानी इंफाल के मालोम में असम राइफल्स के जवानों के हाथों 10 बेगुनाह लोग मारे गए थे। उन्होंने 4 नवम्बर 2000 को अपना अनशन शुरू किया था, इस उम्मीद के साथ कि 1958 से अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, असम, नगालैंड, मिजोरम और त्रिपुरा में और 1990 से जम्मू-कश्मीर में लागू आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट (एएफएसपीए) को हटवाने में वह महात्मा गांधी के नक्शेकदम पर चल कर कामयाब होंगी।

पूर्वोत्तर राज्यों के विभिन्न हिस्सों में लागू इस कानून के तहत सुरक्षा बलों को किसी को भी देखते ही गोली मारने या बिना वारंट के गिरफ्तार करने का अधिकार है। शर्मिला इसके खिलाफ इम्फाल के जस्ट पीस फाउंडेशन नामक गैर सरकारी संगठन से जुड़कर भूख हड़ताल करती रहीं। सरकार ने शर्मिला को आत्महत्या के प्रयास में गिरफ्तार कर लिया था। क्योंकि यह गिरफ्तारी एक साल से अधिक नहीं हो सकती अतः हर साल उन्हें रिहा करते ही दोबारा गिरफ्तार कर लिया जाता था। नाक से लगी एक नली के जरिए उन्हें खाना दिया जाता था तथा इस के लिए पोरोपट के सरकारी अस्पताल के एक कमरे को अस्थायी जेल बना दिया गया था।

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ख़त्म हुआ अनशन 

मणिपुर में आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट यानी AFSPA के खिलाफ पिछले 16 सालों से अनशन कर रहीं इरोम शर्मिला ने आखिरकार अपना अनशन खत्म कर दिया है. हालांकि उनकी सेहत को लेकर चिंताओं के मद्देनजर अधिकारियों ने मंगलवार शाम उन्हें फिर से वापस अस्पताल ले गए.

इससे पहले मंगलवार दिन में इरोम शर्मिला ने अदालत से निकलकर अपना अनशन खत्म करने का ऐलान किया, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें शहद की एक शीशी दी। इरोम ने शीशी से थोड़ा सा शहद अपनी हथेली पर रखा और उसे देखकर वह भावुक हो गईं. इसके साथ ही उन्होंने कहा, मैं क्रांति की प्रतीक हूं. मैं मणिपुर की मुख्यमंत्री बनना चाहती हूं, ताकि अपने मुद्दों को राजनीति के जरिये उठा सकूं

इरोम ने कहा कि मुझे आज़ाद किया जाए. मुझे अजीब सी महिला की तरह देखा जा रहा है. लोग कहते हैं, राजनीति गंदी होती है, मगर समाज भी तो गंदा है. उन्होंने कहा, मैं सरकार के ख़िलाफ़ चुनाव में खड़ी होऊंगी. मैं सबसे कटी हुई थी. मैंने महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर अमल किया है. मेरा ज़मीर क़ैद था, अब मुझे आज़ाद होना होगा. लोग मुझे इंसान के तौर पर क्यों नहीं देख सकते? मैं अपील करती हूं कि मुझे आज़ाद किया जाए

इससे पूर्व ‘आयरन लेडी’ के नाम से मशहूर इरोम शर्मिला के अनशन तोड़ने के वादे के बाद अदालत से उन्हें जमानत मिल गई थी. शर्मिला के वकील एल रेबादा देवी ने संवाददाताओं को बताया, ‘‘अदालत ने दो गवाहों की गवाही के बाद उन्हें 10,000 रूपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी.’’

साल 2000 में उन्होंने अपने अनशन की शुरुआत की थी और तब से उन्हें जिंदा रखने के लिए पाइप के जरिए जबरन लिक्विड डाइट दी जाती रही है. कुछ दिन पहले इरोम ने अनशन खत्म कर राजनीति में उतरने का फैसला किया था. उनका मानना है कि वह अपने मुद्दों को अब राजनीति के जरिए उठाएंगीं. 44 साल की इरोम ने शादी की भी इच्छा जताई है.
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विशेष 

1. आयरन लेडी इरोम का जन्‍म 14 मार्च 1972 में हुआ था.

2. इरोम मणिपुर से आर्म्‍ड फोर्स स्‍पेशल पावर एक्‍ट 1958, जिसे सशस्‍त्र बल विशेषाधिकार कानून को हटाए जाने की मांग पर  2 नवंबर 2000 से आजतक वो भूख हड़ताल पर हैं. इस भूख हड़ताल के तीसरे दिन सरकार ने इरोम शर्मिला को गिरफ्तार कर लिया. उन्‍होंने जब भूख हड़ताल की शुरुआत की थी, वे 28 साल की युवा थीं. कुछ लोगों को लगा था कि यह कदम एक युवा ने भावुकता में उठाया है. लेकिन समय के साथ इरोम शर्मिला के इस संघर्ष की सच्चाई लोगों के सामने आती गई. आज वह 44 साल की हो चुकी हैं.

3. उन्होंने असम राइफल के जवानों की मुठभेड़ में 10 नागरिकों को मार दिए जाने के खिलाफ यह शुरू किया था. इसके बाद से उन्हें नाक में नली लगाकर ही भोजन दिया जा रहा है.

4. उनके नाम पर अबतक दो रिकॉर्ड दर्ज हो चुके हैं. पहला सबसे लंबी भूख हड़ताल करने और दूसरा सबसे ज्‍यादा बार जेल से रिहा होने का रिकॉर्ड दर्ज है.

5. 2014 में अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस के मौके पर उन्‍हें एमएसएन ने वूमन आइकन ऑफ इंडिया का खिताब दिया था.

6. इरोम शर्मिला ने 1000 शब्दों में एक लंबी ‘बर्थ’ शीर्षक से एक कविता लिखी थी. यह कविता ‘आइरन इरोम टू जर्नी- व्हेयर द एबनार्मल इज नार्मल’ नामक एक किताब में छपी थी. इस कविता में उन्‍होंने अपने लंबे संघर्ष के बारे में बताया है.

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